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मंगलवार, 7 दिसंबर 2021

सूरज मिष्ठान जालोर का शाही समोसा


सुबह-सुबह चाय के बाद वक्त होता है नास्ते का और समोसा हो नास्ते में तो बात ही कुछ और है। 
तो आइये जानते है समोसे का इतिहास 
 
भारत में कहा  से आया समोसा ?
समोसा मध्य एशिया से हिंदुस्तान आया।  इतिहासकारो का मानना है कि  समोसे का ईजाद  ईरान  में  कई सदी पहले एक तिकोनी पेस्ट्री जैसे व्यंजन के रूप में हुआ था, जिसके भीतर  चिलगोजे जैसे ड्राइफ्रूट्स  और चिकन का कीमा भरा जाता था। यह रेशम राजमार्ग के जरिये पूरब ,पश्चिम  व  दक्षिण  पहुंचा। 
     मोरक्कन यात्री इबरबतूता ने अपने यात्रा व्रतांत  में दर्ज किया है की सुल्तान मोहम्मद  बिन तुगलक के दस्तरख्वान (वह कपड़ा  जिस पर खाना रखा जाता था ) में समोसे की जगह सुरक्षित  थी तो अकबर के नौ  रत्नो  में शामिल अबुल फजल इस बात को ताकीद करते हैं कि मुग़ल -ए-आजम की पसंद भी संबोसा यानी  समोसा थी। 
   इसी सिलसिले में एक दिलचस्प बात यह हैं  कि  आमतौर पर इतिहासकार एकमत हैं  कि  आलू भारत में पुर्तगाली लाए। इसका मतलब है कि 16 वीं  सदी के पहले वाले समोसों में कुछ और ही भरा जाता होगा ,आलू तो कदापि नहीं। 

Image credit-Google


सूरज मिष्टान जालोर का प्रसिद्थ  शाही समोसा 
यह दुकान जालोर में मैन बाजार में साण्ड  वाव  के पास स्थित  हैं। 
इनके यह का समोसा बहुत प्रसिद्थ हैं  अगर किसी ने एक बार भी स्वाद चख लाया तो उसे यह का समोसा जैसा स्वाद कही  नहीं मिलेगा। समोसे में भरपूर मात्रा में ड्राईफ्रुट और आलू का मसाला भरा जाता हैं ,उसके ससथ इमली की चटनी हो तो समोसे खाने में और भी लाजवाब लगता हैं 
समोसे का मूल्य -12 रूपये 
भारत में अन्य जगह समोसे को क्या नाम से जानते हैं 
रांची ,झारखण्ड -सिंघाड़ा 
समोसे के अन्य प्रकार 
1 -आलू समोसा 
2 -जैम समोसा 
3 - पास्ता समोसा 
4 - फिश समोसा इत्यादि 

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